इसकी टोपी उसके सर
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एल आर गांधी

सब चिट्टी टोपी का कमाल है, इसकी टोपी उसके सर। पहनते ही इंसान केज़रीवाल बन जाता है। तीन बरस पहले जब ‘सभ्य ‘ दिल्ली सड़कों पर थी  निर्भया -निर्भया चिल्ला रही थी। मोमबत्तीयां सर्द हवा में भी  बुझने का नाम नहीं ले रहीं थी , ऐसे में हमारे कज़री लाल भीड़ में चिट्टी टोपियां बांटने में मशगूल थे। तीन बरस बीत गए और निर्भया का क्रूर गुनहगार बीस को छूट जाएगा। केज़री ने क्रूर मुहम्मद अफ़रोज़ को गले से लगा लिया है। अपने कारनामे के इनाम स्वरूप मियाँ जी को दस हज़ार रूपए और एक सिलाई मशीन से नवाज़ा है। यही नहीं उसे सेटल भी करेंगे ताकि उसे अपने कारनामें सरंजाम देने के लिए चलती बसों में न भटकना पड़े। खाली वक्त में रोज़गार भी अता किया है। मशीन से ‘आप’ की टोपिआँ सिलने का।

निर्भया के माँ -बाप खून के आंसू रो रहे हैं। इन्साफ की दरकार है उन्हें उस मोमबती-गैंग से, दिल्ली की सल्तनत से, लोकसभा -राज्य सभा में पानी पी पी कर चिल्लाने वाले छोटे -बड़े सांसदों से पर उन्हें तो फ़िक्र है अपनी ‘माँ ‘ और उसके दुलारे ‘राज कुमार’ की , कहीं हेराल्ड की कालिख कांग्रेस की राजमाता और राजकुमार को दागदार न कर दे !

किसी साडी गैंग ने निर्भया के कातिल को माकूल सज़ा के हक़ में आवाज़ नहीं उठाई। बस एक जां -बाज़ स्वामी खड़ा है  ७५ बरस का नौजवान ! आपिये तो : अखिलाक की मौत पर मातमज़दा यू पी की दौड़ लगाने वाले ,गजेन्द्र को पेड़ पर फंदा लगा मरते देख ‘मुस्कुराने ‘वाले ,शकूर बस्ती काण्ड पर बवाल मचाने वाले, ‘केज़री’ के ‘किस  फॉर लव’ के जश्न में मशगूल हैं

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