‘काला तीतर’ विवाद में उलझे नवजोत सिंह सिद्धू
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-मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह के लिए पाकिस्तान से लाए थे तोहफे के तौर पर काले तीतर की ट्रॉफी
-मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने तीतर लेने से किया इंकार, कहा, वन्यजीव विभाग की अनुमति के बिना नहीं ले सकते हैं तीतर
-वाइल्ड लाइफ प्रोटैक्शन एक्ट, 1972 के दायरे में आता है काला तीतर
-इसे सौगात के तौर पर भेंट करने से पहले वन्यजीव विभाग की अनुमति अनिवार्य

एम4पीन्यूज|चंडीगढ़

विवादों के घेरे में रहने वाले पंजाब के निकाय मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू के साथ अब एक नया विवाद जुड़ गया है। अबकी बार विवाद की वजह पाकिस्तान से लाई गई ‘काला तीतर’ की ट्रॉफी है। बुधवार को नवजोत सिंह सिद्धू यह ट्रॉफी मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह को भेंट करने पहुंचे लेकिन मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने इस ट्रॉफी को लेने से इंकार कर दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि बिना वन्यजीव विभाग की अनुमति के वह इस सौगात को कबूल नहीं कर सकते हैं।

खुद नवजोत सिंह सिद्धू ने प्रैस कॉन्फ्रैंस के दौरान कहा कि मुख्यमंत्री ने काला तीतर की ट्रॉफी को कबूल नहीं किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि मैं वन्यजीव विभाग से इसकी अनुमति लूंगा क्योंकि इसे रखने की अनुमति नहीं है। सिद्धू ने कहा कि पाकिस्तान दौरे के दौरान जब भी वह मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह का फोन सुनते थे तो रिंगटोन में काले तीतर की आवाज आती थी। इसी दौरान उन्हें पाकिस्तान में किसी ने काले तीतर की सौगात भेंट की तो मुझे लगा कि यह तोहफा कैप्टन अमरिंदर सिंह के लिए अनुकूल है।
इससे पहले भी जब वह पाकिस्तान दौरे से लौटे थे तो उन्होंने पाकिस्तान से लाई गई सौगातों का सबके सामने प्रदर्शित किया था। इस दौरान भी उन्होंने काले तीतर का ब्यौरा दिया था। तब बताया गया था कि इस काले तीतर का शिकार करने के बाद ट्रॉफी तैयार किया गई है। भारत में वाइल्ड लाइफ प्रोटैक्शन एक्ट, 1972 के तहत शिकार करना तो वर्जित है ही, उसका खाल, बाल, नाखून आदि को भी बिना मंजूरी के घर में रखना गैरकानूनी माना गया है।

वाइल्ड लाइफ प्रोटैक्शन, 1972 की धारा 39 का उल्लंघन
काला तीतर वाइल्ड लाइफ प्रौटैक्शन, 1972 के शैड्यूल-4 में आता है। एक्ट में बताए गए शैड्यूल के तहत आने वाले जंगली जानवर या पक्षी आदि को पकडऩा, मारना या उनकी बाल, खाल, नाखून आदि को बिना वन्यजीव विभाग की अनुमति के घर में रखना गैरकानूनी है। इसकी सूचना मिलने पर वन्यजीव विभाग एक्ट की धारा, 39 के तहत कार्रवाई करता है। एक्ट की धारा-39 कहती है कि वाइल्ड लाइफ एनीमल की ट्रॉफी राज्य सरकार की संपत्ति है। इस संपत्ति के मिलने पर किसी भी व्यक्ति को 48 घंटे के भीतर संबंधित थाने या संबंधित अधिकारी को सूचित करना अनिवार्य है। ऐसा न करने की सूरत में व्यक्ति विशेष के खिलाफ वाइल्ड लाइफ प्रौटैक्शन एक्ट, 1972 के उल्लंघन का मामला दर्ज किया जा सकता है।

हरियाणा का स्टेट बर्ड है काला तीतर
काला तीतर हरियाणा का राज्य पक्षी है। चंडीगढ़ हरियाणा की भी राजधानी है। इसीलिए चंडीगढ़ में इस तरह अवैध तरीके से शैड्यूल एनीमल को रखना काफी गंभीर मामला है। हरियाणा के वन्यजीव विशेषज्ञों की मानें तो इस मामले में नवजोत सिंह सिद्धू के खिलाफ सीधे तौर पर मामला दर्ज हो सकता है। हरियाणा में इस पक्षी के संरक्षण को लेकर काफी प्रयास किए जा रहे हैं।

कस्टम विभाग पर सवालिया निशान!
काला तीतर के इस मामले ने अटारी बॉर्डर पर तैनात कस्टम विभाग पर भी सवालिया निशाना लगा दिया है। दरअसल, कस्टम विभाग को यह सुनिश्चित करना होता है कि अटारी बॉर्डर से आने वाले व्यक्ति विशेष के पास भारत के कानून मुताबिक सामान लाने की मंजूरी है। चूंकि काला तीतर की ट्रॉफी बिना मंजूरी के भारत में दाखिल नहीं हो सकती है, इसलिए सवाल यह है कि कस्टम विभाग से यह चूक कैसे हो गई।

वन्यजीव विभाग कर सकता है कार्रवाई
पंजाब वन्यजीव विशेषज्ञों की मानें तो पंजाब वन्यजीव विभाग इस मामले में सख्त कार्रवाई कर सकता है। संभव है कि काला तीतर की ट्रॉफी को तुरंत कब्जे में ले लिया जाए और इसकी पहचान के लिए इसे लैब में भेज दिया जाए। अगर लैब रिपोर्ट में यह बात साबित हो जाती है कि यह काला तीतर की ही ट्रॉफी है तो धारा-39 के तहत सिद्धू पर मामला भी दर्ज हो सकता है।

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