पंजाब में निवेश का मतलब सिर्फ ‘रियल अस्टेट’
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पंजाब इन्वेस्टर्स सम्मिट-2013 की हकीकत

– अकेले रियल अस्टेट कंपनियों ने जुलाई 2016 तक किया 34447 करोड़ रुपए का निवेश

– बाकी सैक्टरों में घोषणा की तुलना आधी से भी कम धनराशि निवेश की शक्ल अख्तियार कर पाई 

– सरकार ने 2013 सम्मिट में 128 एम.ओ.यू. साइन कर करीब 66932 करोड़ रुपए के निवेश का किया था दावा

– अब तक महज 61 कंपनियों ने निवेश में दिखाई रूचि

एम4पीन्यूज।चंडीगढ़
बात मुनाफे की है या कुछ और लेकिन हकीकत यही है कि पंजाब में निवेश का मतलब सिर्फ ‘रियल अस्टेट’ है। रियल अस्टेट सैक्टर को पंजाब खूब रास आया है। 2013 के पंजाब इन्वेस्टर्स सम्मिट की बात करें तो इस दौरान साइन किए गए मैमोरंडम ऑफ अंडरस्टैडिंग में से जुलाई 2016 तक केवल रियल अस्टेट सैक्टर ने पंजाब में जमकर निवेश किया है। खास बात यह भी है कि इन कंपनियों ने जितने निवेश की बात कही थी, उसमें कईयों ने घोषित से ज्यादा के निवेश में रूचि दिखाई है।
हालांकि बाकी सैक्टर्स में निवेश की रफ्तार खासी सुस्त है। इन सैक्टर्स में घोषित निवेश अमलीजामा नहीं पहन पाया। उसपर जो निवेश हुआ भी है, वह भी काफी कम है। अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 2013 से हुए एम.ओ.यू. के तहत अब तक 61 कंपनियों ने प्रदेश में कुल 42015.22 करोड़ रुपए का निवेश किया है, जिसमें अकेले रियल अस्टेट सैक्टर की भागेदारी 34447 करोड़ रुपए की है। मतलब बाकी सैक्टर्स में अब तक करीब 7568.22 करोड़ रुपए का ही निवेश हुआ है। इससे पहले सरकार ने 2013 के सम्मिट के दौरान 128 एम.ओ.यू. साइन कर करीब 66932 करोड़ रुपए के निवेश का दावा किया था। तब यह भी दावा किया गया था कि पंजाब के फूड प्रोसिंग सैक्टर में नई क्रांति आएगी।
22 कंपनियों का मतलब 34447 करोड़ रुपया
रियल अस्टेट सैक्टर में जो निवेश हुआ है, वह केवल 22 कंपनियों ने किया है। इनमें अकेले डी.एल.एफ. यूनिवर्सल का 9475 करोड़ रुपए निवेश किए है जबकि दूसरे नंबर पर औमैक्स ने 5650 करोड़ रुपए का निवेश किया है। हालांकि ओमैक्स ने एम.ओ.यू. में 5350 करोड़ रुपए के निवेश का प्रस्ताव रखा था। इसी तरह, बेस्टेक प्रोजैक्ट्स ने 517 करोड़ रुपए के निवेश का प्रस्ताव दिया था लेकिन कंपनी ने 617 करोड़ रुपए का निवेश किया है। वहीं, सिप्रा अस्टेट 4800 करोड़ रुपए के साथ इस सैक्टर में निवेश करने वाली तीसरी बड़ी कंपनी है।
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बाकी सैक्टर्स में निवेश सुस्त 
कुल 61 कंपनियों में से रियल अस्टेट सैक्टर की 22 कंपनियों को छोड़ दिया जाए तो फूड प्रोसिंग, आई.टी. जैसे सैक्टर्स से जुड़ी बाकी 39 कंपनियों ने 2013 में सरकार के साथ करीब 15489.35 करोड़ रुपए के निवेश का एम.ओ.यू. साइन किया था लेकिन जुलाई 2016 तक करीब 7568.22 का ही निवेश अमलीजामा पहन पाया है। मतलब साफ है कि इन सैक्टर्स में घोषणा की तुलना आधी धनराशि ही निवेश के रूप में हकीकत की शक्ल अख्तियार कर पाई है।
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