सरकारी सर्वे से अचानक गायब हुए 255 परिवार 
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-बठिंडा में स्लम रि-डिवैल्पमेंट सर्वे की हकीकत

-1280 परिवारों का सर्वे कर तैयार की थी रिपोर्ट

-केंद्र सरकार ने आधार नंबर देने को कहा तो संख्या कम होकर रह गई 1025 

-सालभर के मशक्कत के बाद पूरे प्रदेश में एकमात्र स्लम रि-डिवैल्पमेंट की तैयार हुई थी योजना

-सालभर पहले प्रदेशभर के 7 शहरों की 172 बस्तियों को स्लम रिडिवैल्पमेंट के लिए किया गया था चिह्नित

एम4पीन्यूज। चंडीगढ़

पहले जिस सर्वे में कुल परिवारों की संख्या 1280 बताई गई,  सरकारी सर्वे में से अचानक गायब हुए 255 परिवार,  यह हकीकत है, बठिंडा में स्लम रिडिवलैल्पमेंट को लेकर हुए एक सर्वे की। पंजाब सरकार ने यह सर्वे बठिंडा की धोबीआणा कच्ची बस्ती के बाशिंदों को पक्के आवास मुहैया करवाने के लिए किया था।

वैसे तो पंजाब सरकार ने 2015 में ‘हाऊसिंग फॉर ऑल’ स्कीम के तहत प्रदेश के 7 शहरों में करीब 172 झुग्गी बस्तियों को स्लम रि-डिवैल्पमेंट के लिए चिह्नित किया गया है लेकिन पहले चरण में बठिंडा की एकमात्र धोबीआणा कच्ची बस्ती का सर्वे कर इसकी रिपोर्ट हाल ही में केंद्रीय आवास एवं शहरी गरीबी उपशमन मंत्रालय को भेजी थी ताकि ग्रांट का रास्ता जल्द से जल्द साफ हो सके।
पंजाब ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि बस्ती में कुल 1280 परिवारों के ई.डब्ल्यू.एस. मकान बनाने पर प्रति मकान करीब 3.80 लाख रुपए का खर्च आएगा। इसमें करीब 12.80 करोड़ रुपए केंद्र सरकार को जारी करने हैं। मंत्रालय की सेंट्रल सैंग्शनिंग एंड मॉनीटरिंग कमेटी (सी.एस.एम.सी.) ने 28 अप्रैल 2016 को रिपोर्ट पर मोहर लगाते हुए 5.12 करोड़ रुपए ग्रांट की पहली किस्त जारी करने को मंजूरी भी प्रदान कर दी लेकिन शर्त लगा दी कि यह ग्रांट तभी रिलीज की जाएगी जब पंजाब सरकार सभी लाभार्थियों के आधार कार्ड नंबर मुहैया करवाएगी।
बस इसके बाद पूरी कहानी बदल गई। अक्तूबर 2016 तक आते-आते पंजाब सरकार ने नई रिपोर्ट तैयार करते हुए कहा कि 255 परिवारों का ब्यौरा उपलब्ध नहीं हो रहा है। यह परिवार संभवत: मूल जगह से प्रवास यानी जगह छोड़कर चले गए हैं। ऐसे में अब केंद्र सरकार केवल 1025 ई.डब्ल्यू.एस. मकान निर्माण की ग्रांट रिलीज करने पर विचार करे।
2.55 करोड़ रुपए कम हुई ग्रांट  
पंजाब सरकार के इस स्पष्टीकरण से केंद्रीय अनुदान में करीब 2.55 करोड़ रुपए की कटौती हुई है। पहले जहां आवास निर्माण पर 12.80 करोड़ रुपए केंद्रीय अनुदान का अनुमान था, , वह अब घटकर 10.25 करोड़ रुपए रह गया है। इसी हिसाब से केंद्रीय मंत्रालय ने ग्रांट की पहली किस्त के तौर पर 5.12 करोड़ रुपए की बजाए 4.10 करोड़ रुपए रिलीज करने को हरी झंडी दिखाई है।
पाइप लाइन में स्लम रि-डिवैल्पमेंट 
धोबीआणा कच्ची बस्ती के अलावा बठिंडा की 13 स्लम रि-डिवैल्पमेंट योजनाएं अभी पाइपलाइन में है। इसके अलावा, अमृतसर की 15, जालंधर की 87, लुधियाना की 29, पटियाला की 17, बटाला की 7 और जलालाबाद की 3 बस्तियों को स्लम रि-डिवैल्पमेंट स्कीम के तहत चिह्नित किया गया है। अभी इनकी सर्वे रिपोर्ट केंद्र सरकार के पास भेजी जानी है।

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