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एम4पीन्यूज।चंडीगढ़
एक सैनिक की पत्नी के नाम चिट्ठी की कुछ पंक्तियां यहां शेयर कर रहे हैं, जो वो हर रोज अपनी पत्नी की याद में अार्मी पोस्ट में पंद्रह दिन के बाद लिखते थे। जम्मू कशमीर में पिछले साल एक हमले के दौरान वो शहीद हो गए। कैप्टन अबीर की डायरी से उनकी पत्नी के लिए

मैं कहना नहीं चाहता, लेकिन थक जाता हूं

मां के हाथ का दुलार, प्यार याद अाता रहता है

अकसर बिटिया के नर्म हाथों का एहसास

यहां सर्दी में गश्त लगाते हुए महसूस होता है

मैं कहना नहीं चाहता, लेकिन सोचता रहता हूं

बाबा के दिल का दर्द, उनका चला जाना खलता है

मेरे इंतजार में तुम्हारा फोन के पास यूं ही बैठे रहना

मां की आंखों में मेरे अाने का इंतजार खलता है

फिर सोचता हूं अगर यही सोचूंगा तो ड्यूटी कैसे करूंगा

इस तसल्ली में जीता हूं कि मेरी गश्त के दौरान

मैंने चौकसी बरती, और अातंकी फड़के नहीं

अबकी छुट्टियों में मां की गोद में सोऊंगा

बेटी के पास समय बिताऊंगा,

सबका ख्याल रखना, और मेरा भी, तुम्हारा ही हिस्सा हूं

Picture Courtesy: Shutter Stock

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