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यहां लोग करते हैं अकबर की पूजा

एम4पीन्यूज। चंडीगढ़ 

हिमाचल की सुंदर वादियों का नज़ारा लेने हर साल लाखों की संख्या में लोग इन पहाडों में पहुंचते हैं। यहां कि सुंदर वादियां हमेशा सबको आनंदित करती है। प्रदेश में दिसंबर में होने वाली बर्फबारी और अद्भुत स्थानों को देखने हजारों लोग यहां आते हैं। ऐसे में हम आपको बताने जा रहे हैं एक अजीब स्थान के बारे में, जहां लोग अकबर की पूजा करते हैं और बाहरी लोगों को किसी भी चीज को छूने की मनाही है। चंडीगढ़ से इसकी दूरी लगभग 350 किलोमीटर है।

यहां कुछ भी छूना है मना

यहां कुछ भी छूना है मना

मुगल सम्राट अकबर ने मांगी थी माफी :
कुल्लू जिले का मलाणा गांव अपने आप में कई विविधताओं को समेटे हुए है। यहां के लोग अपने देवता जमलू के सिवाए किसी भगवान को नहीं मानते। इस गांव में प्राचीन काल से लोकतांत्रिक व्यवस्था कायम है। कहा जाता है कि मुगल सम्राट अकबर भी इस गांव को अपने अधीन नहीं कर पाया था। कहते हैं कि इस गांव को अपने अधीन करने के लिए अकबर ने यहां के देवता जमलू की परीक्षा लेनी चाही थी।
कहा जाता है कि अकबर बादशाह सबक सिखाने के लिए जमलू देवता ने दिल्ली में बर्फ गिरवा दी थी। इसके बाद अकबर को जमलू देवता से माफी मांगनी पड़ी थी। इस गांव के रीति रिवाज हिंदुओं की तरह हैं यह लोग अपने आपको मानते भी हिंदू ही हैं। गांव में साल में एक बार यहां के मंदिर में अकबर की पूजा की जाती है। इस पूजा को बाहरी लोग नहीं देख सकते हैं।

यहां कुछ भी छूना है मना

Tradition

हजारों की संख्या में आते हैं पर्यटक :
-हिमाचल प्रदेश के कुल्लू के गांव मलाणा में अगर आपने किसी भी चीज को छू लिया तो आपको 1000 रुपए का जुर्माना अदा करना पड़ता।
-यहां कि विचित्र परंपराओं के कारण यहां हजारों की संख्या में पर्यटक आते हैं। यहां अगर आप दुकान से कुछ सामान लेना चाहते हैं तो आपको दुकान की दहलीज पर पैसे रखने होंगे और दुकानदार दहलीज पर ही सामान रख देगा।
-विश्व की सबसे पुरानी पहली लोकतांत्रिक व्यवस्था यहां आज भी कायम है। यहां के निवासी खुद को सिकंदर की सेना के वंशज मानते हैं।
-यहां कि भाषा में कुछ शब्द ग्रीक के भी हैं। इसलिये यहां के रीति-रिवाज भी अलग हैं। गांव में हर जगह बोर्ड में लिखा हुआ है कि इस गांव में किसी भी चीज को छूना मना है।

यहां कुछ भी छूना है मना

यहां कुछ भी छूना है मना

फागली उत्सव :
फागली उत्सव में अठारह करडू अपने मंदिर से बाहर निकलते हैं। अकबर की सोने की मूर्ति और चांदी के हिरण को भी बाहर निकाल कर इनकी पूजा की जाती है। कारदारों का कहना है कि अकबर के लिए समर्पित सिर्फ दो त्योहार हैं। इन्होंने बताया कि जम्दग्नि ऋषि और अकबर के बचन के आधार पर सभी हिंदुओं को यहां परंपरा का विधिवत निर्वहन करना पड़ता है। महिलाएं तीन दिन तक शाम के समय जम्दगिभन ऋषि की धर्म पत्नी रेणुका के दरबार में नृत्य करती हैं। ब्रेसतू राम और पुजारी सुरजणू का कहना है कि फागली उत्सव में जम्दग्नि ऋषि के बारह गांवों के लोग देवता की चाकरी के लिए पांच दिन तक मौजूद रहते हैं।

यहां कुछ भी छूना है मना

यहां कुछ भी छूना है मना

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