एक ऐसा राष्ट्रपति जो हार गया 22 साल बाद…
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गाम्बिया के लोगों ने कंचों से वोटिंग कर एडेमा बैरो को राष्ट्रपति चुना

एम4पीन्यूज। चंडीगढ़

22 साल तक अफ़्रीकी देश गांबिया के राष्ट्रपति रहे याह्या जमेह को राष्ट्रपति चुनाव में चौंकाने वाली हार मिली है। खबरों की मानें तो राष्ट्रपति जमेह ने सरकारी टेलीविजन पर अपनी हार स्वीकार कर ली है। उन्होंने सरकारी टीवी पर विपक्ष के विजयी नेता एडेमा बैरो को फोन किया और और उनको बधाई दी।

उनकी हार बाद गांबिया की राजधानी बानजुल में जश्न मनाने के लिए सड़कों पर उतरे लोगों ने ‘हम आज़ाद हैं, हम अब गुलाम नहीं’ के नारे लगाए। उन्हें राष्ट्रपति चुनाव में एडेमा बैरो ने हाराया जो कि एक प्रॉपर्टी डेवेलपर हैं। एडेमा बैरो को चुनाव में 45 फ़ीसदी से ज़्यादा वोट मिले हैं। 1994 में याह्या जमेह सत्तापलट के बाद राष्ट्रपति बने थे।

1965 में आज़ादी मिलने के बाद गांबिया में सत्ता का हस्तांतरण कभी भी शांतिपूर्ण तरीके से नहीं हो पाया। चुनाव आयोग के अध्यक्ष अल्यू मोमपन्जिए ने चुनाव के इस नतीजे के बाद शांति बनाए रखने की अपील की है। चुनाव आयोग के मुताबिक गुरुवार को हुए चुनाव में एडेमा बैरो को 2,63,515 वोट मिले वहीं राष्ट्रपति याह्या जमेह को 2,12,099 वोट मिले हैं। चुनाव आयोग के अध्यक्ष अल्यू मोमप न्जिए ने कहा, ” कई लोगों को दुख होगा, कुछ लोगों को खुशी होगी लेकिन हम से गांबिया के ही हैं।” एडेमा बैरो 1965 में पैदा हुए थे और साल 2000 के बाद लंदन चले गए जहां उन्होंने रियल एस्टेट की पढ़ाई की। 2006 में गांबिया लौटकर उन्होंने अपनी रियल एस्टेट कंपनी स्थापित की।

51 साल के एडेमा बैरो 2016 में विपक्ष की सात पार्टियों के गठबंधन के उम्मीदवार चुने गए। राष्ट्रपति जमेह पर मानवाधिकार कार्यकर्ता मीडिया, विपक्ष और समलैंगिकों के दमन के आरोप लगाते रहे हैं। 2014 में उन्होंने समलैंगिकों को कीड़ा मकोड़ा कहा था और उन्हें मलेरिया के मच्छरों की तरह मिटाने की बात कही थी। अपने अजीब बयानों को लेकर भी वो चर्चा में रहे हैं, एक बार उन्होंने कहा था कि अगर अल्लाह चाहे तो वो एक अरब साल तक शासन कर सकते हैं।

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