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 कहीं आप जनैटिक्ली-मॉडीफाइड तेल तो नहीं खा रहे क्योंकि भारत में जनैटिक्ली-इंजीनियर्ड मस्टर्ड के इस्तेमाल को अब तक नहीं मिली है मंजूरी

 -भारत में जनैटिक्ली-मॉडीफाइड खाद्य तेल आयात हो रहा लेकिन कितना? भारत सरकार को भी नहीं पता

-खुद भारत सरकार ने 2015 में ही दे दी थी जनैटिक्ली-मॉडीफाइड कैनोला ऑयल के आयात की मंजूरी

एम4पीन्यूज| चंडीगढ़
संभव है कि आपकी थाली में परोसा गया खाना जनैटिक्ली-मॉडीफाइड सरसों के तेल से तैयार किया गया हो। जी हां, बेशक भारत में अभी तक जनैटिक्ली-इंजीनियर्ड मस्टर्ड यानी अनुवांशिक तौर पर तैयार भारतीय सरसों की ‘उन्नत किस्म’ के इस्तेमाल को मंजूरी नहीं मिली है लेकिन विदेश से आयात किया जाना वाला जनैटिक्ली-मॉडीफाइड कैनोला ऑयल यानी विदेशी सरसों का तेल 2015 से ही भारतीय खाने में शामिल हो चुका है।
भारत सरकार की जनैटिक इंजीनियरिंग अप्रैजल कमेटी (जी.ई.ए.सी.) ने 3 सितंबर 2015 को अपनी बैठक में जनैटिक्ली-मॉडीफाइड कैनोला ऑयल के आयात को मंजूरी प्रदान कर दी थी। यह हालत तब है जबकि भारत में जनैटिक्ली-इंजीनियर्ड या मॉडीफाइड खाद्य उत्पादों को लेकर कई सालों से बड़े पैमाने पर विरोध जारी है। इसी का नतीजा है कि अब तक भारतीय सरसों की जनैटिक्ली-इंजीनियर्ड मस्टर्ड की किस्म डी.एम.एच.-11 के कर्मिशयल रिलीज को मंजूरी नहीं मिल पाई है। इसी विरोध के चलते भारत सरकार को मजबूरन जनता से सुझाव व शिकायतें आमंत्रित करनी पड़ी है। 11 अगस्त 2016 को जनैटिक इंजीनियरिंग अप्रैजल कमेटी (जी.ई.ए.सी.) की 130वीं बैठक में भी डी.एम.एच.-11 के मसले पर कमेटी ने जनता से सुझाव व शिकायतें आमंत्रित करने पर जोर दिया।
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कैनोला ऑयल का आंकड़ा नहीं
ताज्जुब की बात यह है कि खुद मंजूरी देने के बावजूद भारत सरकार के पास देश में कुल आयात किए जाने वाले जी-एम कैनोला ऑयल का कोई सटीक आंकड़ा नहीं है। लोकसभा के शीतकालीन सत्र में सोमवार यानी 28 नवंबर 2016 को वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने इस बात को स्वीकार किया कि उनके पास जनैटिक्ली-मॉडीफाइड कैनोला ऑयल के कुल आयात का कोई आंकड़ा नहीं है।
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2015-16 में 10492.1 मिलीयन डॉलर का तेल हुआ आयात
सरकार ने सभी तरह के आयात वेजीटैबल ऑयल का आंकड़ा देते हुए बताया है कि भारत में 2015-16 के दौरान 1015.6 मिलीयन टन वेजीटैबल ऑयल आयात किया है, जिसकी कीमत 10492.1 मिलीयन डॉलर है। इसी तरह, 2016-17 के दौरान अप्रैल से अगस्त तक 5.6 मिलीयन टन ऑयल आयात किया गया, जिसकी कीमत करीब 4207.7 मिलीयन डॉलर है।
बी.टी. ब्रिंजल पर तो हो चुका है जनमत संग्रह
भारत में सरसों से पहले जनैटिक्ली-मॉडीफाइड बैंगन पर भी खूब बवाल हो चुका है। पूर्व पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश तो इस मुद्दे पर पूरे भारत में जनमत संग्रह तक करवा दिया था। सरसों की तरह बैंगन का मुद्दा भी जनैटिक इंजीनियरिंग अप्रैजल कमेटी (जी.ई.ए.सी.) की बैठक में लाया गया था, तब 2009 में कमेटी ने इसके व्यापारिक उत्पादन की मंजूरी प्रदान कर दी थी। इसके खिलाफ पूरे भारत में स्वयंसेवी संस्थाओं ने मोर्चा खोला तो सरकार को बैकफुट पर आना पड़ा। इसपर खुद पर्यावरण मंत्री ने कमान संभाली और तत्काल प्रभाव से व्यापारिक उत्पादन पर रोक लगाते हुए जनमत संग्रह करवाने की घोषणा की। चंडीगढ़ में भी खुद जयराम रमेश ने जनता के विचार जाने। पूरे देश के सुझाव व शिकायत सुनने के बाद इसपर फैसला होना था लेकिन रह-रहकर होने वाले विवाद के चलते मौजूदा समय में भी इसका व्यापारिक उत्पादन नहीं हो पाया है।

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