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नोटबंदी: 30 दिन बाद जानिए देश के हालात

एम4पीन्यूज। चंडीगढ़ 

नोटबंदी लागू होने के 30 दिन गुजर जाने के बाद भी आम आदमी की परेशानी कम होने का नाम नहीं ले रही है और अपनी गाढ़ी कमाई के पैसे निकालने के लिए भी लोगों को बैंकों और एटीएम के बाहर घंटों लंबी कतार में खड़ा होना पड़ रहा है। शहर में या तो चंद एटीएम मशीनें ही काम कर रहीं हैं या फिर जो ठीक हैं उनमें नकदी नहीं होने का हवाला देते हुए अपने शटर गिराकर रखे गये हैं।

जबकि दूसरी तरफ 8 नवंबर के बाद आरबीआई ने फाइनैंशनल सिस्टम में 1,900 करोड़ से ज्यादा करंसी नोट डाले देने की बात कही है। वही इस ही बीच रद्द किए जा चुके 500 और 1000 रुपये के 11.5 लाख करोड़ रुपये के नोट बैंक में जमा हो चुके है। लेकिन आज हम नोटबंदी के फैसले से होने वाले प्रभावों पर कुछ नजर ड़ालेगे। जिससे पता चलेगा कि आखिर नोटंबंदी का असर सकारात्मक रहा है या नकारात्मक।

1. पोस्ट ऑफिसों में भी कैश की कमी :
नोटबंदी के फैसले के बाद यह घोषणा की गई थी कि बैकों के साथ – साथ नई कैरेंसी की सुविधा आपके पोस्ट ऑफिसों में भी उपल्बध होगी लेकिन यह तो कुछ और ही देखने को मिल रहा है। जितने कैश की जरूरत इस वक्त पोस्ट ऑफिस को पड रही है। उसका सिर्फ 30- 35 प्रतिशत ही उन्हें मिल पा रहा है। पोस्टल डिपार्टमेंट ने वित मंत्रायल के साथ जो हाल ही में अनुमान, साझा किया उसके मुताबिक पोस्ट ऑफिसों को 700 करोड़ रुपये की जरूरत है लेकिन उन्हें सिर्फ 300 – 350 करोड़ रुपये ही मिल पा रहा है ऐसे में वह लोगों की जरूरत को पुरा नहीं कर पा रहे है।

2. किसानों का नहीं बिक रहा माल :
नोटबंदी का फैसला कालेधन को खत्म करने के लिए लिया गया था ताकि ईमानदारी के साथ काम हो सके और इसका ज्यादा फायदा किसान से लेकर बाकि लोगों तक पहुंचाया जा सके लेकिन नोटबंदी का असर तो किसान पर उल्ट ही देखने को मिल रहा है। दरअसल उत्तर प्रदेश में किसान को हलात काफी खराब होते जा रहे है। क्योंकि वहां के किसान अपनी धान की फसले नहीं बेच पा रहे है। क्योंकि खरीददार पुरानी करंसी की पेमेंट को ऑफर कर रहे है। जिसके चलते किसानों की 80 प्रतिशत फसले खराब होती जा रही है। साथ ही पश्चिम बंगाल में किसानों के पास पैसे ने होने के चलते वह साहूकारों से ज्यादा ब्याज दर पर कर्ज ले रहे है।

3. डिजिटल – वॉलिट्स को भी ज्यादा फायदा नही :
मोदी सरकार ने डिजिटल पेमेंट को बढावा देने की बात कही थी उन्होंने लोगों से किसी भी पेमेंट को ई पेमेंट के जरिए देने की बात कही थी। लेकिन कही न कही मोदी सरकार का यह नुसका कामजोर होता नजर आ रहा है। क्योंकि नोटबंदी के बाद डिजिटल पेमेंट से जुड़ी कंपनियों को अभी तक ज्यादा फायदा नहीं हुआ है। वही पेटीएम, मोबिक्विक और फ्रीचार्ज जैसी ऑनलाइन कंपनियां फायदे होने की बात कह रही है। लेकिन वह रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के आंकडें बहुत ज्यादा ग्रोथ की तस्वीरे पेश नहीं कर रहे है।

4. शेयर बाजार भी पड़ कमजोर :
जब से नोटबंदी का ऐलान किया गया है तब से भारतीय शेयर बाजार का अट्रैक्शन कम होता नजर आ रहा है। यह बात जीएमओ में इमर्जिंग मार्केट्स इक्विटी टीम के पोर्टफोलियों मैनेजर अमित भरतिया ने कही है। नोटबंदी के बाद भारतीय बाजारों पर असर के बारे में जब अमित से सवाल किया गया तो उनका कहना था कि भारतीय बाजार पर उनका भरोसा पहले से कुछ कम हुआ है। यहां कई कंज्यूमर डिस्क्रिशनरी प्रॉडक्ट्स की बिक्री भी 40- 80 पर्सेंट गिरी है।

5. मनरेगा का बुरा हल :
नोटबंदी के बाद मनरेगा के तहत मजदूरों को होने वाले पेमेंट्स अटका दिए गए है। कम से कम आठ राज्यों ने कैश की कमी के चलते मनरेगा के मजदूरों की पेमेंट्स रुकने की जानकारी केंद्र सरकार को दे दी है।

6. RBI से नहीं मिलेगा सरकार को स्पेशल डिविडेंड :
आरबीआई ने इन बातों को खारिज कर दिया है कि नोटबदली के इस अभियान में बैन किए गए जितने नोट बैंकों में वापस नहीं आएंगे, उतनी रकम की देनदारी आरबीआई के सिर से हट जाएगी और वह उतना ही डिविडेंड सरकार को देगा। आरबीआई का इस पर कहना है कि नोटों को सर्कुलेशन से हटाने भर से उसकी देनदारी खत्म नहीं होगी।

7. ट्रासंपोर्ट कारोबारियों की टूट रही है कमर :
नोटबंदी के बाद पैसा निकालने की तय सीमा के कारण ट्रांसपोर्ट कारोबारी काफी परेशान होते नजर आ रहे है। जिसके चलते उन्हे 55 हजार करोड़ का भी घाटा हुआ है। वही ट्रासंपोर्ट कारोबारी ने पैसे निकालने की सीमा बढाए जाने की मांग की है।

8. सरकार पर भी पड़ा नोटबंदी का असर :
आल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट के अनुसार एक चक्कर में एक ट्रक टोल और चुंगी मिलाकर एक माह में सरकार को 60 हजार रुपए देता है। वही नोटबंदी के चलते 22 लाख से अधिक ट्रको के खडे़ होने से सरकार को 8 नवंबर से 8 दिसम्बर तक करीब 13 हजार करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।

वहीँ नोटबंदी के कारण लोगों को हो रही परेशानी को देखते हुए विपक्षी दलों ने सरकार की तीखी आलोचना की है और जब से संसद का शीलकालीन सत्र शुरू हुआ है तब से विपक्ष दोनों सदनों में लगातार हंगामा कर रहा है जिसके कारण कोई काम काज नहीं हो पाया।

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