ISRO ने 104 सैटेलाइट्स लॉन्च कर दुनिया में जमाई धाक, अब तैयारी आगे की
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एम4पीन्यूज।बेंगलुरु 

डियन स्पेस रिसर्च ऑर्गनाइजेशन (इसरो) ने एक साथ सबसे ज्यादा सैटेलाइट्स लॉन्च करने का वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया। इसरो ने बुधवार को एक साथ 104 सैटेलाइट्स लॉन्च किए। अभी तक किसी भी देश ने एक साथ इतने सैटेलाइट लॉन्च नहीं किए हैं। सबसे ज्यादा सैटेलाइट लॉन्च करने का रिकॉर्ड फिलहाल रूस के नाम था। उसने 2014 में एक बार में 37 सैटेलाइट्स लॉन्च किए थे।

ISRO ने 104 सैटेलाइट्स लॉन्च कर दुनिया में जमाई धाक, अब तैयारी आगे की

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180 विदेशी सैटेलाइट्स लॉन्च कर चुका इसरो :
देश सैटेलाइट्स
US 114
कनाडा 11
जर्मनी 10
सिंगापुर 8
UK 6
अल्जीरिया 4
इंडोनेशिया, जापान, स्विट्जरलैंड 3-3 (कुल 9)
इजरायल, नीदरलैंड्स, डेनमार्क, फ्रांस, ऑस्ट्रिया 2-2 (कुल 10)
SKorea, बेल्जियम, अर्जेंटीना, इटली, तुर्की, लक्जेमबर्ग, UAE, कजाकिस्तान 1-1 (कुल 8)
टोटल 180

ISRO ने 104 सैटेलाइट्स लॉन्च कर दुनिया में जमाई धाक, अब तैयारी आगे की

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ISRO ने तीसरे बार भेजे एकसाथ कई सैटेलाइट्स
– सबसे पहले 714 किलो के CARTOSAT-2 सीरीज के सैटेलाइट को अर्थ ऑर्बिट में छोड़ा गया।
– इसके बाद 664 किलो वजनी बाकी 103 नैनो सैटेलाइट्स को धरती से 520 किलोमीटर दूर सन ऑर्बिट में सेट किया गया।
– सिंगल मिशन में कई सैटेलाइट्स छोड़ने का इसरो का यह तीसरा मौका है।
– इससे पहले 2008 में एक बार में 10 और जून, 2015 में 23 सैटेलाइट लॉन्च किए गए थे।

ISRO ने 104 सैटेलाइट्स लॉन्च कर दुनिया में जमाई धाक, अब तैयारी आगे की

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एक साथ 104 उपग्रहों की लॉन्चिंग से अपनी धाक जमाने के बाद अब देश को इंतजार है इसरो की अगली कामयाबियों का. आपको बताते हैं अब क्या हैं इसरो के इरादे?
चलें चांद की ओर!
2008 में चंद्रयान-I मिशन की कामयाबी के बाद अब इसरो के वैज्ञानिक चंद्रयान-II की तैयारी में जुटे हैं. पिछले मिशन में चांद की कक्षा का चक्कर लगाने वाला उपग्रह यानी ऑर्बिटर छोड़ा गया था. इस बार वैज्ञानिक ऑर्बिटर के साथ चांद पर रोवर उतारने की भी कोशिश करेंगे. कामयाब रहने पर ये रोवर चांद की मिट्टी और चट्टान के नमूनों की जांच करने के बाद जानकारी भेजेगा. करीब 603 करोड़ रुपये के इस मिशन में रूस की स्पेस एजेंसी भी भारत की मदद कर रही है. उम्मीद है कि चंद्रयान-II साल 2018 में चांद की ओर रवाना होगा.

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फिर जाएंगे मंगल!
भारत के मंगलयान मिशन की दुनिया भर में तारीफ हुई थी. इस बार के बजट के दस्तावेजों के अध्ययन से पता चला है कि सरकार ने मंगलयान-II मिशन को भी मंजूरी दे दी है. मिशन के साल 2021-22 तक पूरा होने की उम्मीद है. इस बार वैज्ञानिकों की कोशिश मंगल ग्रह की सतह पर रोबोट उतारने की होगी. मंगलयान-I मिशन के तहत सैटेलाइट को मंगल की कक्षा में स्थापित किया गया था. पिछला मिशन पूरी तरह भारत में विकसित किया गया था. लेकिन मंगलयान-II के लिए फ्रांस की अंतरिक्ष एजेंसी ने भी मदद की पेशकश की है.
पिछले मार्स मिशन का बड़ा मकसद इसरो की काबिलियत साबित करना था. इस बार वैज्ञानिक चाहते हैं कि इसरो का रोबोट मंगल ग्रह पर पुख्ता वैज्ञानिक परीक्षण करे.

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शुक्र ग्रह की होगी सैर
मंगल के अलावा इसरो के वैज्ञानिकों की नजर शुक्र ग्रह पर भी टिकी है. विशेषज्ञ शुक्र ग्रह पर स्पेस मिशन को खासा अहम मानते हैं क्योंकि धरती के बेहद करीब होने के बावजूद इस ग्रह के बारे में बेहद कम जानकारी उपलब्ध है. हालांकि शुक्र ग्रह का मिशन महज ऑर्बिटर भेजने तक सीमित हो सकता है. अब तक सिर्फ अमेरिका, रूस, यूरोपीय स्पेस एजेंसी और जापान ही शुक्र ग्रह तक कामयाब मिशन लॉन्च कर पाए हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने कार्यकाल में विज्ञान और तकनीक को खास तवज्जो देने का ऐलान किया है. वित्त मंत्री अरुण जेटली ने इस बार के बजट में अंतरिक्ष विभाग का बजट 23 फीसदी बढ़ाया है.

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