कांग्रेस बैकफुट पर, भारत बन्द कई राज्यों में रहा ‘फिसड्डी’ जन आक्रोश दिवस
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नोटबंदी पर ‘जन आक्रोश दिवस’

एम4पीन्यूज, चंडीगढ़ 

नोटबंदी के खिलाफ आज विपक्ष ने भारत बंद का आह्वान किया है। इसका कई राज्यों में अलग-अलग असर देखने को मिला। हालांकि कई पार्टियों ने इससे पहले ही किनारा कर लिया था। वहीं भारत बंद पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा सवाल उठाए जाने पर कांग्रेस ने सफाई देते हुए कहा कि उसने ‘भारत बंद’ का आह्वान नहीं किया है लेकिन नोटबंदी के मुद्दे पर पूरे देश में उसका विरोध प्रदर्शन है। विपक्षी दल इसे आक्रोश दिवस के रूप मना रहे हैं। तो आइए एक नजर डालते हैं इसका कहां कितना असर हुआ।

बिहार
राजधानी पटना में बंद का कोई खास असर नहीं देखा गया। राजधानी के सभी सरकारी और निजी स्कूल, बैंक तथा सरकारी दफ्तर खुले हुए हैं। सड़कों पर भी वाहन आम दिनों की तरह चल रहे हैं। हालांकि वामपंथी दलों के समर्थकों ने शहर के प्रमुख डाकबंगला चौराहा से जुलूस निकाला और केन्द्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। वहीं कांग्रेस के कार्यकर्त्ताओं ने भी राजधानी पटना में आक्रोश मार्च निकाला और डाकबंगला चौराहा पहुंचने के बाद नारेबाजी की। वामदलों के प्रभाव वाले जिलों में नोटबंदी के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे कार्यकर्त्ताओं ने कुछ स्थानों पर ट्रेन और सड़क यातायात को बाधित करने का प्रयास किया। दरभंगा से प्राप्त रिपोर्ट के अनुसार भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) के कार्यकर्त्ताओं ने दरभंगा से पटना जाने वाली कमला- बाद में पुलिस ने प्रदर्शन कर रहे लोगों को हिरासत में ले लिया।

राजस्थान
समूचे राजस्थान में आहूत बंद पूरी तरह असफल रहा ओैर शहर के सभी बाजार और व्यापारिक प्रतिष्ठान सामान्य तौर पर खुले रहे। राजधानी जयपुर में सवेरे से ही बाजार सामान्य दिनों की तरह खुले और सड़कों पर आम दिनों की तरह ही यातायात रहा। शहर में कहीं पर भी बंद समर्थकों को दुकानें और व्यवसाय बंद कराते नहीं देखा गया।

जम्मू
जम्मू में जन आक्रोश रैली के दौरान जम्मू-कश्मीर कांग्रेस कमिटी के अध्यक्ष गुलाम अहमद मीर और कुछ कार्यकर्त्ता हिरासत में लिए गए हैं।

त्रिपुरा
त्रिपुरा की राजधानी अगरतला में तृणमूल कांग्रेस और कांग्रेस के हड़ताल के विरोध के बावजूद केंद्र सरकार के नोटबंदी के फैसले के विरुद्ध वाम दलों की अगुवाई में यहां हड़ताल का लोगों के जनजीवन पर व्यापक असर पड़ा है। हड़ताल की वजह से रेलवे समेत यातायात व्यवस्था और व्यवसायिक प्रतिष्ठान पूरी तरह बंद रहे और त्रिपुरा केंद्रीय विश्वविद्यालय समेत अधिकतर शैक्षणिक संस्थान बंद रहे। हड़ताल की वजह से सचिवालय समेत अधिकतर सरकारी कार्यालयों में कामकाज प्रभावित हुआ है। राज्य के कुछ मंत्री और वरिष्ठ अधिकारी अपने कार्यालय पहुंचे लेकिन वाहनों की अनुपलब्धता की वजह से अन्य कर्मचारी कार्यालय नहीं पहुंच पाए। हड़ताल की वजह से अगरतला में अस्पताल,बैंको और डाकघरों को कामकाज पर बुरा असर पड़ा है। वाम दलों ने राज्य में हड़ताल के पक्ष में प्रचार किया है जबकि भारतीय जनता पार्टी(भाजपा) ने नोटबंदी के पक्ष में प्रचार किया है।

केरल
केरल में माकपा के नेतृत्व वाली एलडीएफ सरकार ने 12 घंटे के बंद का आह्वान किया है। यह बंद आज सुबह शुरू हुआ। सुबह छह बजे शुरू हुए बंद के शुरुआती घंटे में कुछ स्थानों पर ऑटोरिक्शा चलती नजर आई जिसके कारण लोगों को कुछ राहत मिली। दूर-दराज के क्षेत्र से यहां के रिजनल कैंसर सेंटर आने वाले मरीजों और रेलवे यात्रियों को लाने-ले जाने के लिए पुलिस वाहनों का इस्तेमाल किया जा रहा है। अधिकांश स्थानों पर केरल राज्य सड़क परिवहन निगम (केएसआरटीएस) और निजी बसें सड़कों से दूर रहीं। ट्रेन से कोट्टायम आने वाले सबीरामाला के कुछ तीर्थयात्रियों ने शिकायत की कि बसों के नहीं चलने के कारण उन्हें अयप्पा मंदिर से जाने में परेशानी का सामना करना पड़ा।

पश्चिम बंगाल
शुरुआत के कुछ घंटों में सामान्य जनजीवन पर खास असर पड़ता नहीं दिखा। सड़कों पर सरकारी बसें और अन्य निजी वाहन उतरे। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया, ‘‘अभी तक कोई बड़ी घटना नहीं हुई है हालांकि जिलों से छिटपुट घटनाओं की खबर है।’’ कोलकाता पुलिस के अतिरिक्त आयुक्त सुप्रतिम सरकार ने बताया कि किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए महानगर में लगभग 3,000 पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है।

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