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-जूनियर हॉकी विश्व कप, जीत बनी मिसाल

एम4पीन्यूज,चंडीगढ़

भारतीय जूनियर हॉकी टीम के विश्व विजेता बनने के बाद देश में हर तरफ जश्न सा माहौल है। आखिर क्यों ना हो। भारतीय युवा बिग्रेड ने 15 साल बाद दूसरी बार विश्व कप का खिताब जीतकर देश और हॉकी प्रेमियों को गौरवान्वित होने का मौका जो दिया है। इस अद्भुत क्षण के प्रतिक्रिया स्वरूप विश्व चैंपियंस के जोरदार स्वागत और उनपर इनामों के बौछार का सिलसिला शुरू हो चुका है।
वर्ल्ड कप जीतने वाले भारतीय जूनियर हॉकी टीम के कैप्टन हरजीत सिंह तुली की मां बलविंदर कौर बेटे की इस उपलब्धि पर खुद को गौरवांवित महसूस कर रहीं है। मां बलविंदर कौर तथा पूरा गांव हरजीत के वर्ल्ड कप जीतने के बाद पलकें बिछाए बेसब्री से उसके आने का इंतज़ार कर रहा है। बलविंदर कौर का कहना था कि बेट के आते ही गांव में ढोल बजवा कर उसका स्वागत करूंगी और पूरा गांव एक बार फिर से दिवाली मनाएगा।

बेटे को मिली उपलब्धिम पिता बेखबर :
– जहां सारा देश हरजीत सिंह तुली की कप्तानी में जूनियर हॉकी वर्ल्ड कप जीतने का जश्न मनाते हुए झूम रहा था वहीं उसके पिता रामपाल सिंह को हरजीत की इस उपलब्धि की खबर तक नहीं।
– वे ट्रक ड्राइवर है और फिलहाल ट्रक लेकर पिछले एक महीने से कोलकाता गए हुए हैं।

ऐसे पायी कामयाबी :
– 10 साल पहले कुराली के चकवाल सीनियर सकेंडरी स्कूल में पढ़ाई के दौरान हरजीत सिंह ने गोपाल हॉकी अकेडमी में कुछ महीने खेला।
– उसके बाद वह जालंधर की सुरजीत हॉकी अकादमी से जुड़ गया। उन्होंने ही उसे पढ़ाया और इस मुकाम तक पहुंंचाया है।
– शुरू से ही गरीबी के आलम में घर के हालात ऐसे नहीं थे कि हरजीत के हॉकी खेलने के खर्च को वहन पर पाते। यहां तक कि उनके पास खेलने के लिए जूते तक नहीं थे।
– हरजीत ने हार नहीं मानी और अपनी मेहनत और कोच अमृतपाल तथा पटवारी सोहन सिंह लाल द्वारा प्रदान की गई सहायता के बूते आगे बढ़ता गया।
– वाहेगुरु की कृपा से आज इस मुकाम तक पहुंच अपने तथा परिवार के सपनों को साकार करने में कामयाबी पाई।

नहीं थे जूते तक के पैसे :
– आंखों में ख़ुशी के आंसू लिए मां बलविंदर कौर ने बताया कि हरजीत ने 11 साल की उम्र में हॉकी खेलना शुरू किया।
– पिता रामपाल सिंह ट्रक ड्राइवर है लिहाज़ा घर का आलम अत्यंत गरीबी वाला था जिसके चलते हमने हरजीत को खेल छोड़ने तक को कह दिया था ।
– उसके पास न ही जूते थे और न ही साइकिल की सुविधा बावजूद इसके हरजीत ने हार नहीं मानी।

जीत के बाद किया मां को फोन :
बलविंदर कौर ने बताया कि उन्होंने घर पर टीवी पर पूरा मैच देखा और भारतीय टीम के जीतते ही पूरा परिवार एवं गांव खुशी से झूम उठा और तालियां बजा कर हरजीत की उपलब्धि को गांववासियों के साथ सेलिब्ट रे किया। वर्ल्ड कप जीतने के बाद हरजीत ने उन्हें फ़ोन कर बधाई दी।

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