Reading Time: 2 minutes

कतारों में लगा भारत

एम4पीन्यूज। दिल्ली

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नोटबंदी की घोषणा के एक महीने बीतने के बाद भी एटीएम के सामने लंबी लंबी कतारें दिख रही हैं। हालांकि अब पूरे देश के लगभाग सभी एटीएम को नए नोट के हिसाब से रिकैलिब्रेट कर लिया गया है। ये जानकारी कैश लॉजिस्टिक एसोसिएशन ऑफ़ इंडिया (सीएलएआई) के अध्यक्ष ऋतुराज सिन्हा ने दी है।ऋतुराज एटीएम की देखरेख और उनमें पैसा डालने वाली कंपनियों के एसोसिएशन के अध्यक्ष हैं। वे भारतीय रिज़र्व बैंक की एटीएम टॉस्क फ़ोर्स की कमेटी में भी शामिल थे।

सभी एटीएम के नए नोटों के लिए तैयार होने के बाद भी आम लोगों के सामने नोट का संकट दूर होता नहीं दिख रहा है। नोटबंदी के इस पूरे महीने के दौरान एटीएम को नए हिसाब से तैयार करने की चुनौती कितनी बड़ी थी और संकट अभी भी क्यों बना हुआ है? पूरे देश में करीब दो लाख दस हज़ार एटीएम हैं। इन एटीएम की देखरेख, इसमें पैसों को भरना और इनके संचालन को देखने वाली सभी कंपनियां कैश लॉजिस्टिक एसोसिएशन के अधीन काम करती है। देश के सभी एटीएम को अब रिकैलिब्रेट कर लिया गया है।

एटीएम तैयार पर पैसा ग़ायब?
एटीएम को हमने नए नोट के हिसाब से बना लिया है, लेकिन चुनौतियां बनी हुई हैं। कई एटीएम में कैश उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि आठ नवंबर, 2016 से पहले रिज़र्व बैंक एटीएम नेटवर्क के लिए जो पैसा उपलब्ध कराती थी, वह पैसा आज नहीं मिल रहा है।
दरअसल अब बहुत सारा पैसा बैंक एकाउंट को दिया जा रहा है। कुछ पैसा डाकघरों के लिए भी रखा जा रहा है। कॉपरेटिव बैंकों के लिए भी अलग से पैसा रखना पड़ रहा है। मौजूदा समय में मोटा अनुमान ये है कि आठ नवंबर से पहले जो पैसा एटीएम नेटवर्क को मिल रहा था, वह अब 50 फ़ीसदी ही रह गया है।

एटीएम रिकैलिब्रेट करने का मतलब क्या?
दरअसल नए नोटों का आकार पहले के नोटों की तुलना में अलग है तो इसके लिए एटीएम के हार्डवेयर से लेकर सॉफ्टवेयर तक में बदलाव करना पड़ता है। दुनिया भर में केवल दो चार कंपनियां ही एटीएम बनाती हैं। एनसीआर, डिबोल्ड, विमकोर जैसी कंपनियां हैं। भारत में तीन चौथाई एटीएम एनसीआर और डिबोल्ड की हैं।

एटीएम रिकैलिब्रेट कैसे किया गया?
भारत में मौजूद हर एटीएम को रिकैलिब्रेट करने की ज़रूरत नहीं थी, लेकिन अधिकांश को करना पड़ा। स्पेसर नामक एक छोटा सा उपकरण होता है, जिसकी मदद से रिकैलिब्रेटिंग होती है। बहुत महंगा नहीं होता है, लेकिन हर एटीएम में इसको लगाना होता है।

स्पेसर के लिए चीन पर निर्भरता?
स्पेसर भारत में भी बनाया जाता है लेकिन आपात स्थिति में हमें बाहर से आयात करना पड़ा। चीन से भी मंगाना पड़ा /लेकिन ये कोई भारी भरकम आयात नहीं कहा जा सकता, जिसमें करोड़ो रूपये खर्च करने पड़े हों। कुछ सौ रूपये के हिसाब से मंगाना पड़ा क्योंकि जरूरत थी। ये बहुत बड़ा मुद्दा नहीं होना चाहिए।

अब क्या है चुनौती?
नोटबंदी के बाद चुनौतियां ही चुनौतियां थीं। पहले तेज़ रफ़्तार से एटीएम में भरे पुराने नोट निकालकर बैंकों को सौंपे गए। उसके बाद एटीएम को रिकैलिब्रेट करने की चुनौती थी। वो भी पूरा कर लिया गया है। अब चुनौती एटीएम में लगातार पैसा भरने की है। पैसे की उपलब्धता कम ज़रूर है लेकिन हमारे लिए अभी की चुनौती यही है।

Recommend to friends
  • gplus
  • pinterest

About the Author

Leave a comment