नोटबन्दी: भारत बंद को नहीं जनता का सहयोग, तो विपक्षी पार्टियां भी बंटी
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नोटबन्दी के बाद भारत बंद के हक में नहीं लोग

एम4पीन्यूज, चंडीगढ़ 

नोटबन्दी के बाद विरोधी पार्टियों पार्टीज ने भारत 28 नवंबर को भारत बन्द का आह्वान किया है। लेकिन भारत बन्द पर विपक्षी पार्टियों को आम जनता का सहयोग मिलता हुआ नज़र नहीं आ रहा है। लोगों का कहना है कि जिन्हें काले धन के लगाम पर एतराज़ है वो लोग ही जाकर भारत बन्द करें। हम सब मिलकर काम करेंगे और 2 घण्टे ज़्यादा ही काम करेंगे।

तो वही भारत बंद के फैसले पर विपक्षी पार्टियों में एकजुटता नहीं दिख रही है। कांग्रेस पार्टी ने अपने को इस बंद से अलग कर लिया है तो तृणमूल कांग्रेस ने कहा है कि वह वामपंथी पार्टियों की ओर से बुलाए गए इस बंद का विरोध करेगी। समाजवादी पार्टी और बसपा ने भी इस पर अपना रुख स्पष्ट नहीं किया है। इससे ऐसा लग रहा है कि बंद का समर्थन सिर्फ वामपंथी पार्टियां कर रही हैं।

लोकसभा में कांग्रेस के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने शनिवार को कहा कि उनकी पार्टी ने 28 नवंबर को भारत बंद का आह्वान नहीं किया है। हालांकि उन्होंने साफ किया कि कांग्रेस ने बिना तैयारी किए नोटबंदी के फैसले के लिए भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाली सरकार के खिलाफ देश भर में प्रदर्शन किया है।

दूसरी ओर वामपंथी पार्टियों की धुर विरोधी तृणमूल कांग्रेस ने नोटबंदी के फैसले के खिलाफ आंदोलन तेज करने का ऐलान किया, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि वह वामपंथी पार्टियों की ओर की जा रही हड़ताल का विरोध करेगी। वामपंथी पार्टियों की ओर से सोमवार को बुलाई गई हड़ताल का समर्थन करने से इनकार करते हुए तृणमूल कांग्रेस ने सुपीएम पर गुपचुप तरीके से भाजपा की मदद करने का आरोप लगाया।

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