जब छुट्टा न होने पर मिली लाइन में खड़े होने की ‘सजा’
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-जब छुट्टा न होने पर मिली लाइन में खड़े होने की ‘सजा’

-तुम पांच सौ का नोट लाए हो, ‘सामने खड़े हो जाओ’

एम4पीन्यूज, चंडीगढ़। 
मुझे मेरे स्कूल के दिन याद आ गए जब होमवर्क न करने पर मैडम लाइन में खड़ा होने की सजा देती थीं। एेसा ही कुछ मंजर आज फेज 1 मोहाली के पैट्रोल पंप पर बना, जब मैंने पैट्रोल डालने को कहा और पैट्रोल डालने वाले भैया ने मुझे पूछा “खुले पैसे हैं या नहीं”, मैंने कहा “नहीं”। कहता- “पांच सौ का नोट है”, मैंने कहा- “हां”। उसके बाद जो हुआ उससे मुझे समझ में नहीं आया मैं खड़ी कहां हूं, स्कूल में या पैट्रोल पंप पर। मुझे बड़ी ही तल्खी से कहा गया- “पांच सौ का नोट है ना, इंतजार करो, थोड़ी देर बार पैट्रोल डालूंगा”। 
जब छुट्टा न होने पर मिली लाइन में खड़े होने की 'सजा'

जब छुट्टा न होने पर मिली लाइन में खड़े होने की ‘सजा’

हमने भी इंतजार किया। देखा एक जेब में भाईसाहब के 500 और 1000 के नोट भरे थे और दूसरी जेब 100 के नोटो से नहाई थी। बावजूद इसके वो हर उस इंसान पर बरस रहा था जो उसे पांच सौ या हजार का नोट देता था। खैर पैट्रोल तो डल गया लेकिन भाईसाहब ने कहा “सामने लाइन देख रहे हो, जाओ वहां खड़े हो जाओ, छुट्टे का इंतजार करो”। 
जब हमने नजर घुमाई, जवान से लेकर बूढ़े अंकल लाइन में “केजी” के बच्चों की तरह खड़े थे। हमारा दिल नहीं माना। फिर भी चलो लाइन में खड़े होने के लिए चले गए। तभी एक अंकल जी बोले “मुझे लग रहा है मैं फिर से नर्सरी क्लास में चला गया हूं और आज होमवर्क न करने की सजा मिली है”। अंकल जी काफी गुस्से में थे वरना मैं तो खिलखिला के हंस देती। 
खैर दो मिनट ही वहां खड़ी हुई थी, मैं मिलने चली गई पैट्रोल पंप के मालिक से। उन्हें बाहर बुलाया, लाइन दिखाई और बोला सर, “मेरी मोदीजी से कोई सांठगाठ नहीं है। ये फैसला न मैंने करवाया न इन लोगों ने”। अापके मुलाजिम की जेब में 100-100 के नोट भरे हुए हैं लेकिन छुट्टा नहीं दे रहे। परेशान कर रहे हैं। 
मालिक को मेरी बात जायज लगी होगी कि उसने उन भाईसाहब को तलब किया और कहा- “दोनों जेबों से पैसे निकालो”। देखा तो 100-100 के नोट भरे थे। डांट लगाई और मेरे साथ साथ सबको लाइन में छुट्टे पैसे वापिस करवाए। 
मैं “दो सौ रुपए” से अमीर और ढ़ेर सारे थैंक यू लेकर घर वापिस आ गई। 

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