नोटबंदी नहीं, वाहियात अारबीआई गाइडलाइंस से बेहाल है जनता, पढिए बैंक कर्मियों की कथनी
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मोदी जी सिर्फ इतनी बात समझ लीजिए बैंकों के बाहर लाइनें खत्म हो जाएंगी

बड़ा सवालः दूर बैठे परिजनों से अॉथराइजेशन लेटर कैसे लाएं

अारबीआई की नित नई गाइडलाइंस से खराब हो रहा है काम

एम4पीन्यूज, चंडीगढ़
अाज एसबीआई बैंक जाना हुआ, पुरानी करंसी नहीं नई करंसी जमा करानी थी लेकिन इस पर भी सवाल। क्योंकि अारबीआई ने बैंकों को करंसी जमा करने पर गाइडलाइन दी हैं जिसमें नई या पुरानी करंसी का जिक्र नहीं किया गया है। अगर रुपए दूर बैठे माता पिता को भेजने हों तो और दिक्कत। हुआ यूं कि नई करंसी अपने पिता जी के अकाऊंट में जमा करानी थी, लेकिन क्योंकि अॉथोराइजेशन लेटर नहीं थी तो रुपए जमा कराने में काफी दिक्कतें हुई। इस पर बैंक मैनेजर से बात हुई। बैंक मैनेजर ने बताया कि अारबीआई ने करंसी जमा कराने पर गाइडलाइन दी हैं लेकिन उसमें पुरानी या नई करंसी का जिक्र तक नहीं है, नतीजतन करंसी जमा कराने वालों की दिक्कतों में कमी नहीं आ रही है।
अॉथराइजेशन लेटर सबसे बड़ी दिक्कत
अब जिसके घरवाले दूर रहते हैं और अनपढ़ हैं या फिर नोटबंदी के बाद जारी हुई गाइडलाइंस के बाद उन्हें अॉथराइजेशन लेटर लेने का समय नहीं मिला वो लोग बैंकों में रुपए जमा नहीं करवा पा रहे, नतीजा लोगों में गुस्सा, लाइनें और पुलिस की तरफ से लाठीचार्ज। अारबीआई के गर्वनर उर्जित पटेल की तरफ से दी जा रही गाइडलाइंस में इतनी कमियां हैं इतने लूपहोल्स है कि ये गाइडलाइंस जमीनी हकीकत से कहीं दूर है। जिस वजह से खामियाजा सिर्फ अाम अादमी को झेलना पड़ रहा है।
मोदी जी को खुली सलाह
1. आसानी से अकाऊंट्स में नई करंसी अासानी से जमा हो
2. मजदूर कामगार कम से कम पांच से दस हजार की राशि अपने परिजनों के खातों में जमा करा सकें
3. जमा खातों में अॉर्थराइजेशन लेटर की जगह पारदर्शिता लाने के लिए जमा कर्ता से महज खाता धारक से रिलेशन को जाहिर करने वाला दस्तावेज या पहचान पत्र लिया जाए।

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