नोटबंदी से पंजाब चुनाव पर गहरा सकते हैं ‘ड्रग्स’ के बादल
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-निर्वाचन आयोग चुनाव में शराब, नारकोटिक्स/ड्रग्स के बढ़ते इस्तेमाल पर जता चुका है चिंता

एम4पीन्यूज|चंडीगढ़
नोटबंदी के कारण पंजाब चुनाव में इस बार सियासी दल ‘नशे’ की ‘खेप’ बांटने पर ज्यादा जोर दे सकते हैं। राजनीतिक विशेषज्ञों की मानें तो नोटबंदी के चलते सियासी दलों के लिए इस बार सीधे तौर पर नकदी बांट पाना आसान नहीं होगा। इसीलिए वह मतदाताओं को रिझाने के लिए नारकोर्टिक्स/ड्रग्स व शराब पर ज्यादा निर्भर रह सकते हैं।
खुद भारत निर्वाचन आयोग भी पंजाब में चुनाव के दौरान नारकोटिक्स/ड्रग्स व शराब के बढ़ते इस्तेमाल पर चिंता जता चुका है। चिंता की वजह इसलिए भी है क्योंकि पंजाब में 2012 के विधानसभा चुनाव से लेकर 2014 के लोकसभा चुनाव तक नारकोटिक्स/ड्रग्स व शराब के ग्राफ में तेजी से उछाल आया है।
2014 में 783.44 करोड़ रुपए की नारकोटिक्स/ड्रग्स पकड़ी गई
निर्वाचन आयोग की मानें तो 2012 के विधानसभा चुनाव के बाद 2014 में हुए लोकसभा चुनाव तक महज दो साल में पंजाब के भीतर चुनाव के दौरान ड्रग्स व शराब बांटने के ग्राफ में काफी उछाल आया है। 2012 के विधानसभा चुनाव में जहां करीब 54 करोड़ रुपए की नारकोर्टिक्स/ड्रग्स पकड़ी गई वहीं 2014 में यह आंकड़ा बढ़कर 783.44 करोड़ पहुंच गया।
इसी तरह, 2012 में जहां करीब 2.59 करोड़ रुपए की कुल कीमत वाली शराब पकड़ी गई वहीं 2014 में यह आंकड़ा बढ़कर करीब 22.18 करोड़ रुपए हो गया। हालांकि नकदी के मामले में थोड़ी कमी हुई है। 2012 में जहां 11.51 करोड़ रुपए की नकदी पकड़ी गई थी, वहीं 2014 में महज 1.04 करोड़ रुपए ही पकड़े गए।
पाकिस्तान बॉर्डर के चलते ज्यादा चिंता
पंजाब की सीमा पाकिस्तान से सटे होने के कारण निर्वाचन आयोग की पंजाब पर पैनी निगाहें हैं ताकि बॉर्डर पार से नशे की खेप पर अंकुश लगाया जा सके। इसीलिए निर्वाचन आयोग ने नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो को अनुरोध किया है कि आगामी चुनाव के दौरान ब्यूरो पंजाब में नोडल ऑफिसर तैनात करे, जो सीधे पुलिस, एक्साइज, आयोग के अधिकारियों से संपर्क में रहे।
आयोग ने दिए हैं सी.ई.ओ. को सख्त कदम उठाने के निर्देश
चुनाव में ड्रग्स, शराब व पैसे की शक्ति के बढ़ते इस्तेमाल से निपटने के लिए ही निर्वाचन आयोग ने चीफ इलैक्ट्रल ऑफिसर को इलैक्शन एक्सपैंडेचर मॉनीटरिंग के लिए सख्त कदम उठाने को कहा है। इसके तहत इलैक्शन एक्सपैंडेचर मॉनीटरिंग के लिए नोडल ऑफिसर्स की तैनाती अनिवार्य तौर पर की गई है। चीफ इलैक्ट्रल ऑफिस में जहां कम से कम एडिशनल/ज्वॉइंट सी.ई.ओ. को नोडल ऑफिसर तैनात करना सुनिश्चित किया गया है वहीं पुलिस डिपार्टमेंट में इंस्पैक्टर जनरल ऑफ पुलिस या इसके बराबर रैंक वाले ऑफिसर को नोडल ऑफिसर लगाने के निर्देश हैं।
एक्साइज डिपार्टमेंट में एक्साइज कमिश्नर स्तर के अधिकारी को तैनात किया जाना है जबकि डायरैक्टर जनरल ऑफ इन्कम टैक्स को भी अनुरोध किया गया है कि वह डी.आई.टी. स्तर के अधिकारी को नोडल ऑफिसर तैनात करें। यह सभी नोडल ऑफिसर्स एन्फोर्समैंट एजेंसीस, निर्वाचन अधिकारियों, एक्सपैंडेचर ऑब्जर्वर्स, असिस्टैंट एक्सपैंडेचर ऑब्जर्वर फ्लाइंग स्कवॉड व स्टेटिक सर्वेलांस टीम के साथ तालमेल रखेंगे ताकि नारकोर्टिक्स/ड्रग्स, शराब सहित मनी पावर पर शिकंजा कसा जा सके। वहीं, निर्वाचन आयोग ने चीफ इलैक्ट्रल ऑफिसर को यह भी निर्देश दिए हैं कि वह एक्सपैंडेचर सैंसटिव विधानसभा क्षेत्र, एक्सपैंडेचर सैंसटिव पॉकेट्स भी चिह्नित करें।

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