Reading Time: 3 minutes

– ज़हरीला धुआं ले रहा जान

एम4पीन्यूज,दिल्ली 

स्मॉग का असर अब लगभग खत्म हो चुका है। लेकिन प्रदूषण खत्म होने का नाम ही नहीं लेता है। ये प्रदूषण सिर्फ हमारे लिए ही मुसीबत नहीं बना हुआ है। बल्कि ट्रैफ़िक पुलिस के सिपाही जो लाइट प्वाइंट पर रोज़ क़रीब 10 घंटे तक ड्यूटी देनी होती है। प्रदूषण उनकी ज़िन्दगी का सबसे बड़ा जोखिम साबित हो रहा है।

8 गुना ज़्यादा ज़हरीला धुंआ, खत्म कर रहा इनकी ज़िन्दगी

8 गुना ज़्यादा ज़हरीला धुंआ, खत्म कर रहा इनकी ज़िन्दगी

राजधानी दिल्ली में 5500 ट्रैफ़िक कर्मचारी हैं। जितनी देर वो सड़क पर होते हैं, उसी अनुपात में उनके फेंफड़ों में ज़हरीला धुआं जाता है। सांस की बीमारियों के अलावा भी सेहत के कई जोखिम हैं – मसलन आंखों में तकलीफ़. पिछले साल पुणे में कई ट्रैफ़िक पुलिसकर्मियों की जांच में ये बातें सामने आई थीं।

8 गुना ज़्यादा ज़हरीला धुंआ, खत्म कर रहा इनकी ज़िन्दगी

हालांकि ख़ुद ट्रैफ़िककर्मी अपनी समस्याओं को लेकर खुलकर नहीं बोलना चाहते। ड्यूटी पर तैनात एक ट्रैफ़िक कांस्टेबल का कहना था – ज़्यादातर पढ़े-लिखे लोग ट्रैफ़िक नियमों का उल्लंघन करते हैं और अपनी ग़लती भी नहीं मानते। दंड से बचने के लिए वो नियम तोड़कर भागते हैं और अपना ही एक्सीडेंट करवा लेते हैं, जिसका जवाब भी हमें ही देना पड़ता है।

8 गुना ज़्यादा ज़हरीला धुंआ, खत्म कर रहा इनकी ज़िन्दगी

8 गुना ज़्यादा ज़हरीला धुंआ, खत्म कर रहा इनकी ज़िन्दगी

सुबह 6 बजे ही शुरू भाग-दौड़ :
ट्रैफ़िक कांस्टेबल का दिन सुबह 6 बजे शुरू होता है। खाने के लिए उन्हें किसी पेड़ की छांव ढूंढनी पड़ती है और न मिलने पर सड़क किनारे खड़े होकर ही उन्हें अपना लंच करना होता है। ड्यूटी के लंबे घंटों के दौरान उन्हें अगर शौचालय जाना हो, तो भी उसकी उचित व्यवस्था नहीं होती। महिला पुलिसकर्मियों के लिए यह बड़ी समस्या है। एक महिला ट्रैफ़िक कांस्टेबल का कहना था – प्रदूषण के अलावा पब्लिक टॉयलेट की कमी की वजह से हमें काफ़ी दिक़्क़तें होती हैं।

8 गुना ज़्यादा ज़हरीला धुंआ, खत्म कर रहा इनकी ज़िन्दगी

8 गुना ज़्यादा ज़हरीला धुंआ, खत्म कर रहा इनकी ज़िन्दगी

प्रदूषण सबसे बड़ी समस्या :
ट्रैफ़िक कर्मियों के लिए सबसे बड़ी समस्या है प्रदूषण। पर्यावरण पर काम करने वाली संस्था सीएसई ने पिछले साल फ़रवरी में बताया था कि दिल्ली की आईटीओ क्रॉसिंग पर खड़े ट्रैफ़िक पुलिसवाले औसत से आठ गुना ज़्यादा धुआं पी रहे हैं। इस साल दीवाली के तुरंत बाद सीएसई ने कहा कि नवंबर के पहले हफ़्ते में राजधानी का 24 घंटे का औसत प्रदूषण वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइज़ेशन के आंकड़े से 40 गुना ज़्यादा और भारतीय पैमाने से 15 गुना ज़्यादा था।

8 गुना ज़्यादा ज़हरीला धुंआ, खत्म कर रहा इनकी ज़िन्दगी

8 गुना ज़्यादा ज़हरीला धुंआ, खत्म कर रहा इनकी ज़िन्दगी

सभी ट्रैफ़िक कर्मियों के पास पॉल्युशन मास्क भी नहीं हैं :
जानकारी के मुताबिक़ अभी सभी ट्रैफ़िक कॉन्स्टेबल्स को पॉल्युशन मास्क नहीं मिल पाए हैं। हालांकि प्रपोज़ल दिया जा चुका है कि पॉल्युशन मास्क उनकी यूनिफ़ॉर्म का हिस्सा होना चाहिए, जो मंज़ूर हो गया है। तब तक प्रदूषण नियंत्रण आयोग से मिली जानकारी के आधार पर प्रदूषण प्रभावित इलाक़ों में तैनात ट्रैफ़िक ऑफ़िसर्स को मास्क पहुँचा दिया जाता है।

8 गुना ज़्यादा ज़हरीला धुंआ, खत्म कर रहा इनकी ज़िन्दगी

8 गुना ज़्यादा ज़हरीला धुंआ, खत्म कर रहा इनकी ज़िन्दगी

Recommend to friends
  • gplus
  • pinterest

About the Author

Leave a comment