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एम4पीन्यूज। 

नोटबंदी के बाद से डिजिटल ट्रांजेक्शन में बढ़ोतरी हुई और इसी के साथ बढ़े साइबर हमलों से घबराए बैंक जोखिम को कम करने के लिए साइबर इंश्योरेंस करा रहे हैं. एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में 2016 में करीब चार अरब डालर साइबर क्राइम की भेंट चढ़ गए. अगर विश्व स्तर पर देखा जाए तो 2016 में साइबर क्राइम की वजह से 455 अरब डालर का नुकसान हुआ था. इंश्योरेंस इंडस्ट्री की रिपोर्ट के मुताबिक, साइबर अपराधों में हर साल 40-50 फीसदी की बढ़ोतरी हो रही है.

इसी वजह से डिजिटल लेनदेन से जुड़ी कंपनियां इससे बचने के साथ-साथ नुकसान के जोखिम को कम करने की कोशिश कर रही हैं. वर्ष 2015 में साइबर इंश्योरेंस का कुल प्रीमीयम केवल 2.5 अरब डालर था, जो 2016 में बढ़कर 3.5 अरब डालर हो गया. इसका सीधा सा मतलब ये है कि बैंक साइबर इंश्योरेंस पर पहले के मुकाबले ज्यादा खर्च कर रहे हैं.

पिछले साल साइबर हमले का शिकार हुआ स्टेट बैंक अब अपने तीस करोड़ ग्राहकों की सुरक्षा की खातिर इंश्योरेंस पर विचार कर रहा है. एसबीआई के मैनेजिंग डायरेक्टर रजनीश कुमार ने बताया कि हम अपने ग्राहकों के लिए साइबर कवर लेने पर विचार कर रहे हैं. हमने अपने पैनल में शामिल एडवाइजर से इस पर एक रिपोर्ट तैयार करने को कहा है.

इसी तरह से बैंक आफ बड़ौदा के मैनेजिंग डायरेक्टर पी एस जयकुमार ने कहा, हमें अपने कस्टमर को प्रोटेक्ट करना है. जब भी जरूरत होगी हम भी साइबर इंश्योरेंस कराएंगे. इस बीच खबर है कि एक्सिस बैंक ने एचडीएफसी अर्गो से साइबर इंश्योरेंस कवर लिया है.

बैंक आफ बड़ौदा के एक लाख डेबिट कार्ड का डाटा लीक होने की खबरें आई थीं. जानकारी के मुताबिक, करीब बीस बैंक और अन्य संस्थान गंभीरता से साइबर इंश्योरेंस पर बातचीत कर रहे हैं. न्यू इंडिया इंश्योरेंस के चेयरमैन जी श्रीनिवासन ने बताया, साइबर इंश्योरेंस कवर देने के लिए हमारी कुछ बैंकों से बात चल रही है.

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