रहस्य बना ये शिवलिंग, हर साल बढ़ता है इसका आकार
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एम4पीन्यूज। 

शिवालयों या अन्य मंदिरों में अक्सर शिवलिंग का आकार छोटा देखा जाता है। लेकिन क्या कभी आपने ऐसे शिवलिंग के बारे में सुना है जिसका आकार हर साल लगातार बढ़ता ही जा रहा है। छत्तीसगढ़ के गरियाबंद ज़िले में एक ऐसा ही शिवलिंग है जो हर किसी को हैरान कर देता है।

अपने आप में बेहद अनूठे और अद्भुत शिवलिंग की खासियत यही है कि इसका आकार हर साल बढ़ता जा रहा है। ख़ास बात यह भी है कि यह शिवलिंग प्राकृतिक रूप से निर्मित है। यह शिवलिंग जमीन से लगभग 18 फीट ऊंचा और 20 फीट गोलाकार है। राजस्व विभाग द्वारा हर साल इसकी उचांई नापी जाती है, जिसमें हर साल यह 6 से 8 इंच तक बढ़ा हुआ पाया जाता है।

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हर साल सावन के महीने में पड़ने वाले सोमवार को यहां मेले जैसा नज़ारा देखने को मिलता है। इस अद्भुत शिवलिंग के दर्शन करने और जल चढ़ाने दूर-दराज से श्रद्धालु यहां पहुँचते हैं। इस शिवलिंग को यहां भूतेश्वरनाथ के नाम से जाना जाता है। छत्तीसगढ़ में इसे अर्धनारीश्वर शिवलिंग होने की मान्यता प्राप्त है। इस शिवलिंग के आकार के लगातार हर साल बढ़ने की विशेषता की वजह से ही यहां हर साल भक्तों की संख्या में इजाफा हो रहा है।

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प्रत्येक वर्ष बढ़ता है शिवलिंग का 6-8 इंच आकार
इस शिवलिंग के चमत्कार को देखकर लोगों के मन में उनके लिए श्रद्धा अौर विश्वास है। शिवलिंग का आकार स्वयं बढ़ता जाता है। जमीन से इसकी ऊचांई 18 फीट अौर गोलाई 20 फीट है। प्रत्येक वर्ष इसकी ऊंचाई मापने पर पता चलता है कि इसका आकार निरंतर 6 से 8 इंच बढ़ रहा है।

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इस प्रकार हुई थी शिवलिंग की स्थापना
इस शिवलिंग के बारे में बताया जाता है कि सैकड़ों वर्ष पूर्व यहां शोभा सिंह नाम का व्यक्ति प्रत्येक शाम खेतों को देखने जाया करता था। वहां खेत पर शिवलिंग के आकार के टीले से सांड और शेर के दहाड़ ने की आवाज आती थी। शोभा सिंह ने जब इस आवाज के बारे में ग्रामीणों को बताया तो उन्होंने इन जानवरों को खोजने का प्रयास किया परंतु उन्हें कहीं भी कुछ नहीं मिला। तब से लोग उस टीले को शिवलिंग का स्वरुप मानते हैं अौर उनकी पूजा करते हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार पहले इस शिवलिंग का आकार छोटा था परंतु समय के साथ इसकी लंबाई अौर गोलाई में वृद्धि होती गई, जो आधुनिक समय में भी बढ़ रही है।

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पुराणों में भी है वर्णन
छत्तीसगढ़ी भाषा में हुंकारने की ध्वनि को भकुर्रा कहा जाता है इसलिए इस जगह का नाम भुतेश्वरनाथ, भकुरा महादेव पड़ गया। कई पुराणों में भी इसका वर्णन है। पुराणों के अनुसार इस अद्भुत अौर भव्य शिवलिंग का पूजन करने से श्रद्धालुअों की संपूर्ण इच्छाएं पूर्ण होती है।

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वनों में स्थापित हैं शिवलिंग
यह शिवलिंग घने वन में होने के कारण भी यहां बहुत संख्यां में श्रद्धालु आते हैं। यहां से संबंधित चमत्कार के कारण ये लोगों के आकर्षण का बिंदु है। बहुत से भक्त प्रत्येक वर्ष यहां शिवलिंग के बढ़ते आकार को देखने आते हैं।

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